The other side
(written by –manish chauhan)
कश्मीर बारामुला जोकि कश्मीर के एक बहुत सेंसीटिवे सेक्टर है! किस कैंप में रणजीत सिंह अपनी बीबी से बात कर रहा है!
रणजीत सिंह: "आज हमारी बेटी २ साल कि हो गयी! और अब वोह बोलने भी लगी है!"
बीबी: "काश! तुम यहाँ पर होते और उसके मुह से पापा सुन पाते उसने सुबह से पापा पापा कि रट लगा राखी है!"
रणजीत सिंह: "तुम उसे फ़ोन दो में उसकी मुह से एक बार पापा सुनना चाहता हु!"
तभी एक सिपाही रूम में इंटर करता है और सलुते करते हुए बोलता है कि सर आपके लिए एक उरगेनत मेसेज है! और इसी हड़बड़ी में रणजीत सिंह से अपनी बीबी का फ़ोन कट जाता है!
रणजीत सिंह सिपाही से फ़ोन लेता है और बात करना सुरु करता है! दूसरी तरफ रणजीत सिंह के सेनिओर मेजोर राठोर है!
रणजीत सिंह:"जय हिंद सर!"
मजोर राठोर: "जय हिंद!" अभी अभी हमें एक सुचना मिली है कि कुछ आतंकवादी जिनमे मौलाना जफ़र भी है मैं सिटी में आने वाले है! "
रणजीत सिंह :"अप छींटे न करे सर! में अपने जवानों के साथ जान कि बजी लगा दूंगा पर उन्हें आगे नहीं बढ़ने दूंगा!"
मजरों राठोर: "मुझे तुमसे यही उम्मीद थी!"
रणजीत सिंह:"जय हिंद सर!"
मजोर राठोर: "जिद हिंद!"
रणजीत सिंह अपने घर फ़ोन मिलाने कि कोशिश करता है पर फ़ोन बहुत बार मिलाने के बाद भी नहीं मिलता!
दूसरी तरफ मुंबई में सेंट्रल जेल:
सेंट्रल जेल के बाहर रात के दस बजे का वक़्त था! लेकिन अभी भी वह इतनी चहल पहल थी कि पूरा सेंट्रल जेल रौशनी से नहाया हुआ था! राजीव खन्ना के बेटे ब्रिजेश खन्ना के केस का फैसला आ चूका था! राजीव खन्ना जो एक बहुत बड़े फिल्म स्टार थे और उनके बेटे पर आतंकवादियों के साथ साठ गठ और हथियार चुराने का आरोप लगा था! लेकिन पुरे साबुत न मिलने कि वजह से कल सुबह उसकी रिहाई होने वाली थी! इसी लिए वह मीडिया का एक मेला सा उमड़ पड़ा था!
तभी जेल के अन्दर से एक खबर आती है कि ब्रिजेश खन्ना ने अभी भगवन को याद किया और उसी वक़्त उन्हें अपनी खिड़की पर एक बन्दर दिखा और मीडिया इसी तरह कि किसी बकवास का इन्तेजार कर रहा था! और यह न्यूज़ सब चंनेलो कि ब्रेअकिंग न्यूज़ बन गयी! इस तरह कि फालतू खबरे हर पाच मिनट पर मीडिया तक पहुचाई जा रही थी! और मीडिया उन खबरों कि मिर्च मसाला लगाकर एक ब्रेअकिंग न्यूज़ के रूप में प्रस्तुत कर रहा था! रात के ११ बज चुके थे! ब्रिजेश खन्ना अपने सेल में चुपचाप बेठा हुआ था! और कल सुबह का इन्तेजार कर रहा था !
उसी वक़्त कश्मीर बारामुल्ला सेक्टर पर कैप्टेन रणजीत सिंह अपने पाच जवानों के साठ मोर्चा संभाल चुका था! और कुछ पाच मिनट बाद उसे दूर से कुछ लोगो के आने का अहसास होने लगा!
रणजीत सिंह (mick): "कौन हो तुम लोग रुक जाओ!"
रणजीत सिंह कि इस बात का उत्तर उन लोगो ने गोलियों से दिया! और सिर्फ १०० मीटर कि दुरी से दनादन फिरिंग स्टार्ट कर दी! और उसका खामियाजा रणजीत सिंह को अपने तीन जवानों को खोकर चुकाना पड़ा! अचानक हुई इस फिरिंग में रणजीत सिंह ने अपने तीन काबिल सिपाही खो दिए! अब सिर्फ रणजीत सिंह और उनके दो सिपाही उनके साठ थे!
रणजीत सिंह अपने एक सिपाही से: "यह लोग तो पूरी तरह से तैयार होकर आये है!"
सिपाही: "साहब यह भी नहीं पता कि यह है कितने?"
रणजीत सिंह: "अब जितने भी हो हमें सुबह तक यही रोकना है क्योकि मौसम ख़राब होने कि वजह से कोई मदद यहाँ नहीं पहुच सकती!"
और रणजीत सिंह के एक इशारे पर इधर से भी फिरिंग स्टार्ट हो जाती है! अब ईट का जवाब पत्थर से दिया जा रहा था! सायद उधर भी कुछ लोगो को गोलिया लगी थी क्योकि वह से हलचल कम हो गयी थी! लेकिन फिरिंग जारी थी! १ घंटे से ज्यादा हो चुका था! और दोनों तरफ से फिरिंग रुकने का नाम नहीं ले रही थी!
दूसरी तरफ सेंट्रल जेल में रात के ३ बज चुके थे! ब्रिजेश खन्ना सो नहीं पा रहा था! वो खुली हवा में सास लेना चाहता था! और ये भी जानता था कि वोह कसूरवार है लेकिन उसे अपने पिता रसुक पर पूरा भरोसा था और इसी भरोसे कि वजह से वो आजाद होने वाला था! उसे कोई फरक नहीं पड़ता था कि उसकी वजह से ३०० जिन्दगिया ख़तम हो चुकी थी!
दूसरी तरफ, वक़्त गुजरता जा रहा था और फिरिंग रुकने का नाम नहीं ले रही थी! अब सिर्फ रणजीत सिंह और एक सिपाही बचा हुआ था! और दोनों गुटों के बीच दुरी भी २०-२५ मीटर कि हो चुकी थी! रणजीत सिंह को अंदाजा हो चुका था कि उधर भी ज्यादा लोग नहीं है! तभी दूसरी तरफ से एक हैण्ड ग्रीनडे रणजीत सिंह के पास आकार गिरा और एक धमाके के साथ रणजीत सिंह और उसके बचे हुए सिपाही अलग अलग हो गए!
रणजीत सिंह: "सतनाम! तुम ठीक तो हो न?"
लेकिन दूसरी तरफ से कोई आवाज नहीं आ रही थी! रणजीत सिंह समझ चुका था कि सतनाम सिंह भी उसका इस जंग में साथ छोड़ चुका है! सुबह होने में अभी भी तीन घंटे बाकि थे! और मदद पहुचने में कम से कम ५ घंटे तो लगते ही! फिर भी रणजीत सिंह हार मानने को तैयार नहीं था! वोह एक पागल सांड कि तरह लड़ रहा था! और दूसरी तरफ से अचानक फिरिंग बंद हो गयी! रणजीत सिंह बुरी तरह घायल था! उसके शारीर पर कई घाव थे जिनसे खून रिस रहा था! उसकी सासे कमजोर पद रही थी!
दूसरी तरफ:
सुबह के ७ बज चुके थे! ब्रिजेश खन्ना का पहला कदम जेल से बाहर निकलते ही उन्हें मीडिया वालो ने घेर लिया! उसकी माँ और बहन ने उसे ऐसे गले लगा लिया जैसे सालो बाद मिली हो! मीडिया इसे ऐसे दर्शा रहा था जैसे कि राम १४ वरस का वनवास काटकर वापिस लोटा हो!
मीडिया में एक रिपोर्टर: " सर आपको जेल से बाहर खुली हवा में सास लेकर कैसा लग रहा है?"
ब्रिजेश खन्ना:"में बता नहीं सकता मुझे कितना अछा लग रहा है और में यह जानता था कि में बेकसूर हु! ये मुझे फ़साने कि एक चाल थी!"
माँ: "मेरा बेटा देश का हीरो है! और अज न्याय कि जीत हुई है! में दिल से जानती थी कि वोह बेकसूर है और भगवान् सब देख रहा है!"
रिपोर्टर: "क्या अप अपनी रिहाई का कोई वास्ता उस बन्दर के साथ देखते है जिसे कल अपने अपनी खिड़की पर देखा था?"
ब्रिजेश खन्ना: "हाँ! बिलकुल मैं एक हनुमान भक्त हु! और में यह जानता हु कि बजरंग बलि अपने फसे हुए भक्तो कि किसी भी हाल में मदद करते है!"
और इस तरह के फालतू प्रश्नों का जिसके लिए मीडिया पोपुलर है एक बरसात हो चुकी थी! लेकिन ब्रिजेश खन्ना और उसकी फॅमिली के पास इन प्रश्नों का उत्तर देने का बहुत टाइम था!
दूसरी तरफ:
रणजीत सिंह के पास बिलकुल वक़्त नहीं था! वो और सिर्फ मौलाना जफ़र आमने सामने थे! और तभी रणजीत सिंह कि बन्दुक से निकली हुई एक गोली मौलाना जफ़र के सिर पर लगी और उसका काम तमाम हो गया! और माहोल अचानक शांत हो गया! रणजीत सिंह कि ऑंखें धीरे धीरे बंद होने लगी थी! सायद भारत माँ का एक और लाडला अपनी आखरी सासे गिन रहा था! और कुछ देर बाद रणजीत सिंह कि सासों ने उसका सास छोड़ दिया! वोह हमारे लिए अब शहीद हो चुका था! सुबह के १० बज चुके थे! दूर से आती हुई इंडियन आर्मी को देखा जा सकता था सायद मदद पहुच चुकी थी! जो अब कोई जरुरत नहीं थी! क्योकि रणजीत सिंह अपना काम कर चुका था!
दूसरी तरफ: हर चैनल और हर अखबार पर ब्रिजेश खन्ना कि रिहाई एक हेअद्लिने के रूप में प्रस्तुत कि गयी थी! हर न्यू चैनल पर एक ब्रेअकिंग न्यूज़ फ्लेश हो रही थी कि ब्रिजेश खन्ना रिहा हो चुके है! और इसे एक सच्चाई कि जीत मन जायेगा! यह जानते हुए भी कि सायद वोह कही न कही ३०० लोगो कि मौत का जिम्मेवार था! लेकिन अब ब्रिजेश खन्ना आजाद था! और खुली हवा में सास ले रहा था!
दूसरी तरफ रणजीत सिंह के घर पर अचानक फ़ोन रिंग करता है! और उसी वक़्त उनकी बेटी जो माँ के गोद में है पहली बार पापा बोलती है! रणजीत सिंह कि वाइफ फ़ोन कि तरफ लपक पड़ती है! और रणजीत सिंह कि मौत कि खबर सुनते ही एक बुत कि तरह शांत कड़ी हो जाती है! और छोटी सी दो साल कि बेटी पापा पापा बोलती रहती है इस बात से अनजान कि अब उसके पापा कभी नहीं आएंगे! वोह पापा तो बोल सकती है लेकिन उसके मुह से पापा सुनने के लिए उसके पापा अब उसके साथ नहीं है!
समाप्ति.....
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